Last Updated on May 5, 2019 by Jivansutra
Farmer and Golden Egg Story in Hindi
– सुकरात
श्यामनगर में रामू नाम का एक किसान अपने परिवार के साथ रहता था। रामू बहुत गरीब था। दिन भर हाड-तोड़ मेहनत करने के बाद भी, उसे दो जून की रोटी के लाले पड़े रहते थे। कई बार तो उसकी पत्नी भी उसकी बदनसीबी के लिये उसे ताने मारा करती थी। एक दिन एक सिद्ध महात्मा रामू के घर भिक्षा मांगने के लिये आये। जब रामू ने उन्हें भोजन कराकर अपनी गरीबी का रोना रोया, तो महात्माजी को बड़ी दया आयी।
उन्होंने अपने आस-पास नजरें घुमाई, तो उन्हें एक मुर्गी चारा चुगते दिखी। उन्होंने रामू से उस मुर्गी को पकड लाने के लिये कहा। उनकी आज्ञानुसार रामू मुर्गी को पकड़ कर उनके सामने ले आया। महात्मा जी ने कुछ समय के लिये अपनी भेदक दृष्टि उस मुर्गी पर स्थिर की और फिर रामू से बोले – “बेटा! तुम बहुत गरीब हो और तुमने मेरी सेवा भी की है, इसीलिये, आज मै तुम्हे इस गरीबी से पीछा छुड़ाने का सरल उपाय बता रहा हूँ।”
“यूँ तो यह एक आम मुर्गी है, लेकिन अपने तपोबल से मैंने इसमें परिवर्तन ला दिया है। कल से यह मुर्गी हर रोज एक सोने का अंडा दिया करेगी, जिसे तुम बाजार में बेच कर काफी धन कमा सकते हो। लेकिन ध्यान रहे अपने लोभ पर हमेशा नियंत्रण रखना, जिसका बीज मै तुम्हारे अन्दर देख भी रहा हूँ। इतना कहकर, महात्मा रामू की सेवा का शानदार मूल्य चुकाते हुए चले गये।
Farmer and Golden Egg Story in Hindi
रामू ने वह बात अपनी पत्नी को बतायी, जो स्वभाव से लालची और मूर्ख थी। पहले तो उसने अपने पति की बात का बिल्कुल भी भरोसा नहीं किया, लेकिन जब अगले दिन मुर्गी ने सोने का अंडा (Golden Egg) दिया, तो वह फूली नहीं समायी। अंडा लेकर रामू बाजार गया और उसे काफी पैसा मिला। इस तरह से मुर्गी हर रोज एक सोने का अंडा देती और रामू उसे बाजार जाकर बेच आता।
थोड़े ही दिनों में उसके पास बहुत पैसा इकठ्ठा हो गया। उसने उस पैसे से जमीन खरीदी, एक बड़ा और आलीशान मकान बनाया और कई पशु भी ख़रीदे। इसके अलावा अपने परिवार की सेवा करने के लिये उसने कई नौकर भी रख लिये थे। अब उसकी जिंदगी मजे से, चैन से कट रही थी। गाँव में हर कोई उसका एक अमीर इन्सान के रूप में सम्मान करता था।
लेकिन जैसे कि पुरानी कहावत है कि धन के साथ-साथ लोभ भी बढ़ता चला जाता है, वैसा ही कुछ रामू के साथ भी हुआ। जैसे-जैसे रामू के पास धन आता गया, वैसे-वैसे उसकी और उसकी पत्नी की तृष्णा भी बढती चली गयी। विशेषकर उसकी पत्नी की मांगों की तो कोई सीमा ही नहीं थी। अब वह रोज ही रामू से सुन्दर-सुन्दर कपडे और बेशकीमती हार के लिये फरमाइश करती।
लालच बुरी बला है, इससे बचो
फिर एक दिन फिर वही हुआ जिसका डर था, और जिसके लिये महात्मा उसे चेतावनी भी दे गये थे। एक दिन जब सुबह मुर्गी ने सोने का अंडा (Golden Egg) दिया और रामू उसे लेकर बाजार चला, तो उसकी पत्नी ने ताने मारते हुए कहा – “कब तक यूँ ही एक-एक अंडा बेचकर, दो-दो कौड़ी जमा करते रहोगे? अगर एक ही बार में मुर्गी के पेट से सारे अंडे निकालकर बेच दोगे तो जरा सी देर में बहुत सारा पैसा इकठ्ठा हो जायेगा।”
अब तक लालच रामू के मन में भी गहराई तक जड़ जमा चुका था। उसने पत्नी की मूर्खताभरी समझदारी की तारीफ़ की और तुरंत ही घर के अन्दर से एक बड़ा चाक़ू ले आया। फिर यह सोचकर कि मुर्गी के पेट में बहुत सारे अंडे होंगे, उसने मुर्गी का पेट चीर डाला। बेचारी मुर्गी तड़प-तड़पकर मर गयी। पर यह क्या? मुर्गी के पेट से तो एक भी सोने का अंडा नहीं निकला। यह देखकर रामू और उसकी पत्नी दहाड़ें मार-मारकर रोने लगे।
उन्हें इस बात का दुःख नहीं था कि उनकी बेवकूफी से निर्दोष मुर्गी मारी गयी, बल्कि उन्हें तो इस बात का पछतावा हो रहा था कि उनके लालच ने उनकी बर्बादी का रास्ता खोल दिया था। उन्हें अपना भविष्य अंधकारमय दिखने लगा, पर अब हो भी क्या सकता था? आखिर तब पछताये क्या होत जब चिड़िया चुग गयी खेत। इसलिये सयाने लोगों ने सच ही कहा है कि लालच बुरी बला है।
– पवन प्रताप सिंह
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